Можно ли вступать в интимную близость во время послеродового очищения и менструации? - Ан-Ниса - Мусульманский женский портал

Можно ли вступать в интимную близость во время послеродового очищения и менструации?

Вопрос:

Ассаляму алейкум, уважаемый муфтий сахиб.

Я нуждаюсь в помощи и, поскольку это крайне важно — воздержаться от греховного поступка, без чувства неловкости задаю следующий вопрос.

Согласно Исламу, половой акт запрещен после родов, до тех пор пока полностью не прекратится истечение крови. Существует ли другой способ, посредством которого муж может получить сексуальное удовлетворение в этот период? И разрешено ли жене лежать на животе, а мужу входить сзади между ее сомкнутыми бедрами (не в анус), чтобы таким образом достичь сексуального удовлетворения?

Ответ:

С Именем Аллаха, Милостивого, Милосердного

Ассаляму алейкум ва рахматуллахи ва баракятух!

Вступать в половую близость во время менструального цикла и послеродового очищения запрещено. Однако мужу дозволено получать удовольствие от того, что находится выше пупка и ниже коленей супруги. Область между пупком и коленями запрещена. Но если эта область покрыта, например, тонкой тканью или чем-то подобным, то мужу дозволено наслаждаться ею через покрытие.

(وقربان ما تحت إزار) يعني ما بين سرة وركبة ولو بلا شهوة، وحل ما عداه مطلقا
(قوله وقربان ما تحت إزار) من إضافة المصدر إلى مفعوله، والتقدير: ويمنع الحيض قربان زوجها ما تحت إزارها كما في البحر (قوله يعني ما بين سرة وركبة) فيجوز الاستمتاع بالسرة وما فوقها والركبة وما تحتها ولو بلا حائل، وكذا بما بينهما بحائل بغير الوطء
[رد المحتار ج١ ص ٢٩٢ ايج ايم سعيد]

(قَوْلُهُ) : (وَلَا يَأْتِيهَا زَوْجُهَا) ذَكَرَهُ بِلَفْظِ الْكِنَايَةِ تَأَدُّبًا وَتَخَلُّقًا وَاقْتِدَاءً بِقَوْلِهِ تَعَالَى {فَإِذَا تَطَهَّرْنَ فَأْتُوهُنَّ} [البقرة: 222] ، وَإِنْ أَتَاهَا مُسْتَحِلًّا كَفَرَ وَإِنْ أَتَاهَا غَيْرَ مُسْتَحِلٍّ فَعَلَيْهِ التَّوْبَةُ وَالِاسْتِغْفَارُ، وَقِيلَ يُسْتَحَبُّ أَنْ يَتَصَدَّقَ بِدِينَارٍ، وَقِيلَ بِنِصْفِ دِينَارٍ وَالتَّوْفِيقُ بَيْنَهُمَا إنْ كَانَ فِي أَوَّلِهِ فَدِينَارٌ، وَإِنْ كَانَ فِي آخِرِهِ أَوْ وَسَطِهِ فَنِصْفُ دِينَارٍ وَهَلْ ذَلِكَ عَلَى الرَّجُلِ وَحْدَهُ أَوْ عَلَيْهِمَا جَمِيعًا الظَّاهِرُ أَنَّهُ عَلَيْهِ دُونَهَا وَمَصْرِفُهُ مَصْرِفُ الزَّكَاةِ، وَلَهُ أَنْ يُقَبِّلَهَا وَيُضَاجِعَهَا وَيَسْتَمْتِعَ بِجَمِيعِ بَدَنِهَا مَا خَلَا مَا بَيْنَ السُّرَّةِ وَالرُّكْبَةِ عِنْدَهُمَا، وَقَالَ مُحَمَّدٌ يَسْتَمْتِعُ بِجَمِيعِ بَدَنِهَا وَيَجْتَنِبُ شِعَارَ الدَّمِ لَا غَيْرُ وَهُوَ مَوْضِعُ خُرُوجِهِ وَلَا يَحِلُّ لَهَا أَنْ تَكْتُمَ الْحَيْضَ عَلَى زَوْجِهَا لِيُجَامِعَهَا بِغَيْرِ عِلْمٍ مِنْهُ،
[لجوهرة النيرة على مختصر القدوري ص ٣٨ مير محمد كتب خانه]

لا يحل له وطؤها في حالة الحيض لقوله تبارك وتعالى {ويسألونك عن المحيض قل هو أذى فاعتزلوا النساء في المحيض ولا تقربوهن حتى يطهرن} [البقرة: 222] فصارت حالة الحيض مخصوصة عن عموم النص الذي تلونا.
وهل يحل الاستمتاع بها فيما دون الفرج؟ اختلف فيه قال أبو حنيفة وأبو يوسف — رضي الله عنهما — لا يحل الاستمتاع بما فوق الإزار وقال محمد — رحمه الله — يجتنب شعار الدم وله ما سوى ذلك واختلف المشايخ في تفسير قولهما بما فوق الإزار قال بعضهم المراد منه ما فوق السرة فيحل الاستمتاع بما فوق سرتها ولا يباح بما تحتها إلى الركبة وقال بعضهم المراد منه مع الإزار فيحل الاستمتاع بما تحت سرتها سوى الفرج لكن مع المئزر لا مكشوفا ويمكن العمل بعموم قولهما بما فوق الإزار لأنه يتناول ما فوق السرة وما تحتها سوى الفرج مع المئزر إذ كل ذلك فوق الإزار فيكون عملا بعموم اللفظ والله سبحانه وتعالى أعلم.
]بدائع الصنائع في ترتيب الشرائع 5/ 119[

قال أبو حنيفة وهو رواية عن أبي يوسف يجوز الاستمتاع بالحائض بما فوق السرة وما تحت الركبة.
وتحرم المباشرة بين السرة والركبة بدون الإزار، وهو قول سعيد بن المسيب، وسالم، والقاسم، وشريح، وطاووس، وقتادة، وسليمان بن يسار، ومالك، والشافعي — رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ — وحكاه البغوي عن أكثر العلماء. وقال محمد: يجوز الاستمتاع بما دون السرة بلا إزار، ويجب عليه اجتناب شعار الدم وهو قول عطاء، والشعبي، والنخعي، والثوري، وأحمد، وأصبغ المالكي، وأبي ثور، وإسحاق، وابن المنذر، وداود، واحتجوا بما روي عن ابن عباس في قَوْله تَعَالَى: {فَاعْتَزِلُوا النِّسَاءَ فِي الْمَحِيضِ} [البقرة: 222] (البقرة: الآية 222) ، أي فاعتزلوا نكاح فروجهن،
البناية شرح الهداية (1/ 646[

وأما الاستمتاع بها بغير الجماع فمذهب أبي حنيفة وأبي يوسف والشافعي ومالك يحرم عليه ما بين السرة والركبة وهو المراد بما تحت الإزار، كذا في فتح القدير وفي المحيط وفتاوى الولوالجي وتفسير الإزار على قولهما قال بعضهم الإزار المعروف ويستمتع بما فوق السرة ولا يستمتع بما تحتها وقال بعضهم هو الاستتار فإذا استترت حل له الاستمتاع. اهـ. والظاهر ما اقتصر عليه في فتح القدير.
البحر الرائق شرح كنز الدقائق ومنحة الخالق وتكملة الطوري

А Всевышний Аллах знает лучше.

Салим Хан

Студент Даруль-Ифтаа,


Брэдфорд, Великобритания

Проверено и одобрено муфтием Ибрагимом Десаи.

daruliftaa.net

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16.05.2017
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