Желательно ли регулярно обновлять никах? - Ан-Ниса - Мусульманский женский портал

Желательно ли регулярно обновлять никах?

Вопрос:

Является ли желательным регулярно обновлять никах? Это дозволено, если муж с женой женаты и не было никакого развода?

Ответ:

Во Имя Аллаха, Милостивого ко всем на этом свете и только к верующим – на том

Ассаляму алейкум ва рахматуллахи ва баракатух.

Если никах не был расторгнут безвозвратным разводом (талак баин) и если брак не был расторгнут из-за окончания идды в возвратном разводе, в котором муж не воспользовался правом вернуть жену[1], то обновление никаха (тадждид ан-никах) не имеет никаких основ в Шариате и не приносит никакой пользы[2].

А Всевышний Аллах знает лучше.

Мухаммад Харис Сиддики

Студент Даруль Ифта,

Мельбурн, Австралия

Проверено и одобрено муфтием Ибрахимом Десаи.

[1]  فتاوی محمودیہ ۱۲\۳۳۵ ۔ دار الافتاء جامعہ فاروقیہ

وَالْفرق بَين الرَّجْعِيّ والبائن أربعة عشر خصْلَة: أحدها الطَّلَاق الرَّجْعِيّ لَا يحْتَاج إلى تَجْدِيد النِّكَاح — النتف في الفتاوى للسغدي (1/ 322) [مؤسسة الرسالة]

( قوله صريح ) هو ما لا يستعمل إلا في حل عقدة النكاح سواء كان الواقع به رجعيا أو بائنا كما سيأتي بيانه في الباب الآتي ( قوله وملحق به ) أي من حيث عدم احتياجه إلى النية كلفظ التحريم أو من حيث وقوع الرجعي به وإن احتاج إلى نية : كاعتدي واستبرئي رحمك وأنت واحدة أفاده الرحمتي ( قوله وكناية ) هي ما لم يوضع للطلاق واحتمله وغيره كما سيأتي في بابه . ( قوله ومحله المنكوحة ) أي ولو معتدة عن طلاق رجعي أو بائن غير ثلاث في حرة وثنتين في أمة أو عن فسخ بتفريق لإباء أحدهما عن الإسلام أو بارتداد أحدهما ، ونظم ذلك المقدسي بقوله : بعدة عن الطلاق يلحق أو ردة أو بالإباء يفرق بخلاف عدة الفسخ بحرمة مؤبدة كتقبيل ابن الزوج ، أو غير مؤبدة كالفسخ بخيار عتق وبلوغ وعدم كفاءة ونقصان مهر وسبي أحدهما ومهاجرته ، فلا يقع الطلاق فيها كما حرره في البحر عن الفتح ، وكذا ما سيأتي آخر الباب : لو حررت زوجها حين ملكته فطلقها في العدة لا يقع ويأتي تمام الكلام عليه آخر الكنايات . ( قوله وأهله زوج عاقل إلخ ) احترز بالزوج عن سيد العبد ووالده الصغير ، وبالعاقل ولو حكما عن المجنون والمعتوه والمدهوش والمبرسم والمغمى عليه ، بخلاف السكران مضطرا أو مكرها ، وبالبالغ عن الصبي ولو مراهقا ، وبالمستيقظ عن النائم .وأفاد أنه لا يشترط كونه مسلما صحيحا طائعا عامدا فيقع طلاق العبد والسكران بسبب محظور والكافر والمريض والمكره والهازل والمخطئ كما سيأتي (رد المحتار على الدر المختار)

[2]  امداد الفتاوی ۲\۲۶۳ ۔ مکتبہ دار العلوم کراچی

344

Последние статьи
13.07.2017
Подробнее
05.07.2017
Подробнее
11.06.2017
Подробнее
© 2017 Ан-Ниса. Все права защищены. При использовании материалов ссылка на сайт annisa-today.ru обязательна.